Summary of Oh! I Wish I’d Looked After Me Teeth in Hindi

कविता, ‘Oh, I Wish I’d Looked After Me Teeth’ Pam Ayres की सबसे प्रसिद्ध कविता है। इसे ‘नेशन की 100 पसंदीदा कॉमिक कविताएं’ नामक बीबीसी सर्वेक्षण के शीर्ष दस कविताओं में से एक के रूप में वोट दिया गया था। कविता का मूड भ्रामक हास्य है। और हास्य के साथ साथ इस कविता में स्वास्थ्य के बारे में एक मार्मिक संदेश भी है। कविता एक ही समय में हंसमुख और निराशाजनक दोनों है।

About the Poet Pam Ayres in Hindi :

Pam Ayres MBE (Member of the Most Excellent Order of the British Empire) का जन्म स्टैनफोर्ड में वेले, बर्कशायर, जो अब ऑक्सफ़ोर्डशायर के रूप में जाना जाता है, में 1947 में हुआ था। वह एक अंग्रेजी कवित्री , हास्य अभिनेत्री, रेडियो और टेलीविजन शो की प्रस्तुतकर्ता और एक bee keeper भी रही। वह फरिन्गेंन माध्यमिक विद्यालय में पंद्रह वर्ष की आयु तक शिक्षित हुई, जिसके बाद वह एक clerical assistant के रूप में सिविल सेवा में शामिल हो गयी। उन्होंने जल्द ही आरएओसी (रॉयल आर्मी ऑर्डनेंस कॉप्स) में शामिल होने के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी और वह महिलाएं रॉयल एयर फोर्स पर चली गयी।

वायुसेना में, उन्होंने ड्राइंग कमेटी में काम किया। यही वह समय था जब उन्हें ऐसा महसूस हुआ कि वह एक मनोरंजक बनना चाहते है। जब वह वहां थी, तब ही उन्हें अंग्रेजी भाषा और साहित्य के लिए O-level passes से सम्मानित किया गया था।


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आखिरकार, उन्होंने ऑक्सफ़ोर्डशायर में एक स्थानीय folk club में अपनी छंद पढ़ना शुरू कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप, उन्हें 1974 में local BBC radio station द्वारा आमंत्रित किया गया।उनकी कविताएं हास्यपद होने के साथ साथ रोजमर्रा की जिंदगी से जुडी हुई है। यूके काउंसिल ऑफ आर्ट्स द्वारा 1998-1999 में ब्रिटेन में पांचवें सर्वश्रेष्ठ-बेचने वाले कवि के रूप में उन्हें सम्मानित किया गया था।

Summary of Oh! I Wish I’d Looked After Me Teeth in Hindi

Stanza 1: कविता के सुरुवात में कवित्री कहती है की काश उन्होंने अपनी दांतो का देखभाल किया होता। काश उन्होंने मीठी चीजे और चॉक्लेट जो की दांतो में चपक जाती हैं वह नहीं खाई होती। तो आज उनके दांतो के मसूड़े के ख़राब होने की कोई चिंता नहीं होती।

Stanza 2: कवि का व्यक्तित्व कहता है की जब उनकी दांते अच्छी थी तब काश उन्होंने कैंडी (gobstoppers) के बजाय अपने पॉकेट मनी से कुछ ख़रीदा होता। अब जब उनकी सारी दांते सड़ चुकी है तब उन्हें इस बात का अहसास हो रहा है की उन्होंने गलती की।

Stanza 3: जब भी कवित्री lollies, liquorices, sherbet dabs and hard peanuts जो की वह बचपन में खाया करती थी, के बारे में सोचती है तो उनका विवेक कौशल उनकी अंतरआत्मा को चुभता है। अब जब वह उन सभी अपराधों के अंतिम परिणाम को जानती है, तो वह खुद को दोषी महसूस करती है।


Stanza 4: इस पंक्तियों में, कथाकार स्वीकार करता है कि उसकी मां ने हमेशा उसे दांतो के देखभाल के बारे में चेतावनी दी थी। वह याद करती है कि उसकी मां कैसे कहती थी कि एक दांत एक मित्र की तरह होता है। इसलिए उनकी विशेष देखभाल की जानी चाहिए। लेकिन कवित्री तभी बहुत ही छोटी और लापरवाह थी। उन्होंने अपने दांतों की देखभाल करने के लिए शायद ही कभी समय बिताया होगा। जो टूथ ब्रश वो इस्तेमाल करती थी वो इतनी पुरानी हो चुकी थी की कोई काम की नहीं थी।

Stanza 5: वह कहती है कि वह पूरी तरह से उपेक्षित नहीं थी और उसने हर रात अपने दांतों को ब्रश करने के लिए टूथपेस्ट का इस्तेमाल भी किया था। लेकिन उसने दो दांतों के बीच रिक्त स्थान को ठीक से साफ करने का अतिरिक्त प्रयास कभी नहीं किया। उसने शायद ही ब्रशिंग या फ्लॉसिंग के अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल किया। वह मानती है कि उस समय, यह कार्य उन्हें समय और ऊर्जा के लायक नहीं लगता था। क्योंकि उसके अनुसार, जब तक वह काट सकती थी, उन्हें लगता था की उनके दांत ठीक है।

Stanza 6: यहाँ वह दुःख से कहती हैं की अगर उन्हें पता होता की वे decay, cavities, false caps of teeth के लिए रास्ता बना रही हैं या फिर उन्हें artificial fillings, injections and various drilling machines जो की cavities को भरने के लिए या decayed parts को हटाने के लिए युस किया जाता है, के दर्द को सहना पड़ेगा तो वे अपनी सभी sherbet (frozen dessert) को फेंक देती।

Stanza 7: इन पंक्तियों में हमें यह पता चलता है की कवित्री एक डेंटिस्ट के पास है जबकि वह अपने दांतों के बारे में अपने बचपन के अपराधों को याद कर रही थी। जैसे ही वह दंत चिकित्सक के ओर देखती है वह अपने हाथों में ड्रिलिंग यंत्र लेकर तैयार खड़ा दिखाई पड़ता है। वह अपने वह अपने दांतो की cavities में molars भरवाने गई थी। डेंटिस्ट यह पुष्टि करता है कि छेद को कवर करने के लिए उसे दो amalgam (मिश्रण) भरने की आवश्यकता पड़ेगी।

Stanza 8: ड्रिल का इंतजार करते हुए वह, शर्मिंदगी से यह याद करती है कि जब उनकी माँ अपने नकली दांतो को साफ़ करती थी तो यह देखकर कैसे वह हँसा करती थी। लेकिन अब वह अपनी युवा गलतियों का पछतावा करती है। क्युकी अब उनकी पारी है ड्रिल करवाने की यह स्थिति उन्हें फैसले की घड़ी के समान लगती है। अब उन्हें अहसास होता है की जल्द ही उन्हें भी नकली दांतो की जरुरत पड़ेगी। कविता उन्ही पंकियो में समाप्त होती हैं जंहा पर सुरु हुई थी की काश उन्होंने अपनी दांतो की देखभाल किया होता

Abhishek is a marketing research and social media consultant who developed a keen interest in blogging. He can be contacted at dey.abhishek99@gmail.com

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