Summary of The Seven Ages of Man in Hindi

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कविता Seven Ages of Man शेक्सपियर के प्रसिद्ध कॉमेडीज “एज यू लाइक इट्स” में से निकाला गया है। यह एक कॉमेडी है। जिसे 1599 के आसपास लिखा गया है और पहले फोलियो (1623) में प्रकाशित हुआ था। Seven Ages of Man पोएम में कवि शेक्सपियर ने पुरे विश्व की तुलना एक नाट्य मंच से की है। उनका मानना है की सभी वयक्ति को इस दुनिया रूपी मंच में अपना किरदार निभाना पड़ता है जो की उन्हें ईश्वर द्वारा दिया गया है। हर वयक्ति को अपने जीवनकाल में साथ चरणों से होकर गुजरना पड़ता है, जो की उनके जीवन के सात चरण होते हैं। तो यहाँ हम Summary of The Seven Ages of Man in Hindi जानेंगे। 


About the Poet in Hindi:

विलियम शेक्सपियर को अंग्रेजी भाषा की दुनिया में सबसे महान लेखक माना जाता है। वह एक अंग्रेजी कवि, एक नाटककार और अभिनेता थे। उन्हें इंग्लैंड में राष्ट्रीय कवि माना जाता है। उनके कार्यों में करीब 38 नाटकों, 154 सॉनेट्स, कुछ लंबी कविताएं और अन्य छंद शामिल हैं। उनकी शारीरिक विशेषताओं, कामुकता, धार्मिक विश्वास आदि के बारे में काफी विवाद है। उनके कुछ प्रसिद्ध नाटकीय त्रासदियों में हेमलेट, मैकबेथ, ओथेलो और किंग लीयर शामिल हैं। शेक्सपियर की 23 अप्रैल, 1616 को 52 वर्ष की आयु में मृत्यु हो गई, उसकी पत्नी और दो बेटियां थी।

Summary of The Seven Ages of Man in Hindi

The first stage, अपने जीवन के प्रथम चरण में वह एक नवजात सिसु होता है जो की असहाय होता है। उसे गोद में उठाकर उसका ध्यान रखना पड़ता है। वह थोड़ी थोड़ी से बातो पर रोने लगता है, उल्टियां करता है।

उसके जीवन का अगला चरण दुनिया में एक बच्चे के रूप में प्रकट होता है जो अपने कंधे से बैग लटका के बिना मन के जबरदस्ती स्कूल जाता है। वह एक घोंघे की तरह रेंगते हुए बेमन से स्कूल की तरफ बढ़ता है।

अपने जीवन के तीसरे चरण में, एक पुरुष एक प्रेमी की तरह होता है। वह इच्छाओं, महत्वाकांक्षाओं और सपने से भरा एक जवान आदमी बन जाता है। वह एक रोमांटिक युवक बन जाता है। उसे प्यार हो जाता है और प्यार की अग्नि उसे जलती रहती है । वह अपनी प्रेयसी को दुखी कविताये लिखना शुरू कर देता है, वह अपनी उदासीन भावनाओं को नियंत्रित नहीं कर पाता।

अपने जीवन के चौथे चरण में मनुष्य एक सिपाही बन जाता है, जो की गन्दी और अभद्र सब्दो का उपयोग करता है। उसने इस चरण में उसने कई तरह के विचित्र और गंदे सब्द सिख लिए हैं।  वह खुद को एक दाढ़ी के सहारे शक्तिशाली दिखाने की कोशिश करता है। वह भावनात्मक और ईर्ष्यापूर्ण है। वह अपने सम्मान और अनुग्रह के लिए दूसरों के साथ झगड़ता है। वह चिड़चिड़ा बन जाता है और अस्थाई मान सम्मान के पीछे भागता है।


अपने जीवन के पांचवें चरण में, वह एक न्यायाधीश बन जाता है। उसे ऐसा प्रतीत होता है की वह काफी समझदार एवं experienced हो गया है। उसके यौवन का जोश पूरी तरह से ठंडा हो जाता है और वह प्रैक्टिकल बन जाता है। वह बेईमान या निष्पक्ष साधनों से धन प्राप्त करना चाहता है। वह रिश्वत लेना सुरु कर देता है और इस प्रकार अपने materialistic सुख के लिए बहुत कुछ जोड़ता है। अब उसे ज्यादा भाग दौड़ पसंद नहीं आता इसकी तुलना में वह बैठना आराम करना ज्यादा पसंद करता है जिसकी वजह से उसके पेट निकल जाते है ।

वह रिस्वत में मिली हुई चिकेन और पक्षीयाँ (healthy fowls) खता है। उसकी आँखे बहुत ही गहरी हो जाती हैं जो काफी कठोर लगती हैं और वह अब साधारण दाढ़ी रखता है।

फिर, अपने जीवन के छठे चरण में, मनुष्य बूढ़ा हो जाता है। अपने चाल चलन अपने उठने बैठने के अंदाज से वह काफी हास्यपद बन जाता है। उसकी आंखे कमजोर हो जाती हैं जिसके लिए उसे चश्मे पहनने पड़ते हैं। अब उसके पैर जूतों में फिट नहीं आते जूतें काफी बडे दिखाई देते हैं। उसकी आवाज भी बदल जाती है जो की shrill and quivering whistle की तरह सुनाई पड़ती है।

हालांकि, अंतिम चरण में, आदमी एक बार फिर एक बच्चे में बदल जाता है वह सब कुछ भूलने लगता है वह ‘टूथलेस’ बन जाता है उसकी दृष्टि कमजोर हो जाती है और उसकी स्वाद इन्द्रियाँ भी काम करना बंद कर देती है। इस तरह वह इस दुनिया को छोड़ने के लिए तैयार हो जाता है।

इस कविता में शेक्सपियर ने व्यंग्य के साथ मनुष्य के जीवन के सात चरण को दिखाया है।  प्रत्येक चरण में, मनुष्य स्वयं को महान और महत्वपूर्ण मानता है, लेकिन प्रत्येक चरण में उसके जीवन में उसके व्यवहार में कुछ न कुछ हास्यास्पद (ridiculous) जरूर होता है।

शेक्सपियर ने मनुष्य के हर स्टेज को बड़ी ही सफलता से दिखाया है और इस सफलता को हासिल करने में उनके द्वारा उपयोग किये गए वर्ड्स जैसे ‘mewling’ of the infant’s cry एवं ‘creeping like a snail’ ने सहायता की है।

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