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IX

कक्षा - 9 'अ' क्षितिज भाग 1 पाठ 16       यमराज की दिशा- चंद्रकांत देवताले यमराज की दिशा का सारांश :  संकलित कविता में कवि सभ्यता के विकाश की खतरनाक दिशा की और इशारा करते हुए कहना चाहता है की आज के समाज में चारो और भ्रस्टाचार फैला हुआ है। समाज में हर जगह बुराई फ़ैल चुकी है। कवि को लगता है की अब…
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